लुधियाना Air Pollution: एक तरफ जहां होजरी व इंडस्ट्री के लिए लुधियाना की विश्वभर में पहचान है। वहीं, यह शहर वायु प्रदूषण के मामले में भी रिकॉर्ड बना रहा है। यह खुलासा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दी गई रिपोर्ट से हुआ है, जिसके मुताबिक लुधियाना वायु प्रदूषण के मामले में देश के पहले 10 शहरों की लिस्ट में शामिल हो गया है। ऐसा नही कि लुधियाना में वायु प्रदूषण की रोकथाम के नाम पर सरकार की तरफ से कोई कोशिश नही रही है, लेकिन यह कवायद नगर निगम की बी एंड आर ब्रांच के अफसरों की मनमानी की भेंट चढ़ गई है। जिसका सबूत यह है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत मिले करोडों के फंड से हरियाली का दायरा बढ़ाने से ज्यादा सड़कें व फुटपाथ बनाने पर खर्च करने पर जोर दिया गया। जिससे अफसरों व ठेकेदारों की जेबें तो भर गई, लेकिन वायु प्रदूषण का लेवल डाउन न होने के मामले में लुधियाना को नेशनल लेवल पर किरकिरी का सामना करना पड रहा है।
पर्यावरण मंत्रालय से पहले सेंटर फॉर रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर द्वारा 100 सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट जारी की गई है, जिसमें लुधियाना को 51 वां ग्रेड मिला है। सी आर ई ए के मुताबिक लुधियाना प्रदूषण के मामले में डब्लयू एच ओ के साथ नेशनल एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड के निर्धारित मापदंडों की लिमिट भी क्रॉस कर गया है, जो कि लोगों की सेहत के नुकसानदायक है। जहां तक पंजाब की बात करें तो सबसे प्रदूषित शहरों में मंडी गोबिंदगढ़ पहले नंबर पर है।
केंद्र सरकार द्वारा वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए 2019 के दौरान जारी किए गए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम में 131 शहरों को शामिल किया गया। जहां प्रदूषण का लेवल डाउन करने की दिशा में प्रयास करने के लिए 19614 करोड़ का फंड रिजर्व किया गया है। जिसके आधार पर 2017 के मुकाबले 20 से 30 फीसदी प्रदूषण लेवल पर काबू पाने का दावा सरकार ने किया है और 2026 तक यह आंकड़ा 40 फीसदी तक जाने का टारगेट रखा गया है। जिसके लिए सिटी लेवल एक्शन प्लान बनाया गया है और उसे लागू करने के लिए 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहरों को फाइनेंस कमीशन की तरफ से ग्रांट दी जा रही है।

