Punjab: पंजाब भर के घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दिए जाने के बावजूद बिजली चोरी की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। बिजली चोरी के मामले में हैरानीजनक आंकड़े भी सामने आए हैं जो कि 2600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। गौरतलब है कि, पंजाब सरकार मुफ्त 300 यूनिट बिजली के बदले में 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्रदान करती है और 2023-24 के दौरान 7 किलोवाट लोड तक के घरेलू उपभोक्ताओं को 2.50 रुपए की छूट के रूप में 1,400 करोड़ रुपये दिए हैं।
चोरी के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता जताते हुए पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंजीनियर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री हरपाल चीमा (Finance Minister Harpal Cheema) से मुलाकात की और समाधान की मांग की है। इंजीनियरों ने कहा कि बिजली चोरी न केवल पंजाब पर एक वित्तीय बोझ है, बल्कि राज्य की ऊर्जा प्रणाली के सम्पूर्ण कामकाज को भी कमजोर करती है। इस मौके पर सरकार ने जल्द ही सख्त कदम उठाने का आश्वासन भी दिया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजी. जेएस धीमान ने सरकार से सहयोग का आह्वान किया। आंकड़ों के मुताबिक तरनतारन सर्कल की 4 डिवीजन, फिरोजपुर, अमृतसर (Amritsar) और संगरूर (Sangrur) सर्कल की 3-3 डिवीजन मुख्य चोरी वाले इलाकों में हैं। सूत्रों के अनुसार, बिजली चोरी से वित्तीय नुकसान के आंकड़ों के अनुसार, भिखीविंड, पट्टी और जीरा डिवीजनों में से प्रत्येक में 110 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, इसके बाद पश्चिम अमृतसर जहां यह राशि 92 करोड़ रुपये है। इन चारों डिवीजनों में कुल नुकसान करीब 435 करोड़ रुपये है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में 50 फीसदी से ज्यादा वित्तीय घाटे वाले पीएसपीसीएल (PSPCL) डिवीजनों की संख्या 6 है। कम बिलिंग वाले शीर्ष 4 डिवीजन में भिखीविंड में 73.32 प्रतिशत, पट्टी में 65.02 प्रतिशत, जीरा में 64.9 प्रतिशत और पश्चिम अमृतसर में 62.96 प्रतिशत हैं। इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने और सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि बिजली विभाग और पंजाब सरकार के खजाने का क्षरण रोका जा सके।

